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dekha hai

March 01, 2026POETRY

अनंत आकाश में तुमने देखे ,बादलों से बनी चित्रकारियां,

 

ओस की बूंदों की पिचकारियां,

 

पर मैंने आज़ाद उड़ते पंछी को देखा है..

Vaishnavi
स्वाभाविक